उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी पर अधिकारियों ने क्यों जताई चिंता? सीमान की नई रणनीति से बढ़ी हलचल
तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी हलचल
तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों कई घटनाक्रम एक साथ चर्चा में हैं। उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी को लेकर सामने आए दावों से लेकर टीवीके के भीतर नेताओं की बयानबाजी और डीएमके नेता थोप्पु वेंकटाचलम को पद से हटाए जाने तक कई मुद्दे राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसी बीच नाम तमिझर काची (NTK) के प्रमुख सीमान ने भी अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है।
उदयनिधि की गिरफ्तारी को लेकर क्या हुआ?
रिपोर्ट के मुताबिक, तंजावुर में एक प्रदर्शन के दौरान अभिनेत्री को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया था। बताया गया कि अधिकारियों ने इस मामले पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत को लेकर मुख्यमंत्री से चर्चा की।
जब मुख्यमंत्री की ओर से पूछा गया कि इस मामले में क्या किया जा सकता है, तो अधिकारियों ने कथित तौर पर मामला दर्ज करने का सुझाव दिया। इसके बाद उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी का विकल्प सामने आया।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अधिकारियों ने गिरफ्तारी को लेकर कई कानूनी और कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताएं भी सामने रखीं। अधिकारियों की ओर से कथित तौर पर यह सवाल उठाया गया कि गिरफ्तारी के बाद रिमांड कैसे होगा, कौन-सी धाराएं लगाई जाएंगी और इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पर क्या असर पड़ सकता है।
इसके बावजूद रिपोर्ट के अनुसार गिरफ्तारी का आदेश दिया गया और इसके बाद उदयनिधि से जुड़ी गिरफ्तारी की कार्रवाई सामने आई।
टीवीके नेताओं को बयानबाजी से बचने की सलाह?
तमिलनाडु विक्ट्री कझगम (TVK) के भीतर भी नेताओं के बयानों को लेकर चर्चा होने की बात कही जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी क्षेत्र से जुड़े कुछ मंत्रियों को सार्वजनिक तौर पर पार्टी या सरकार के आंतरिक मामलों पर बोलने से बचने की सलाह दी जा रही है।
बताया गया है कि सेंगोट्टैयन ने पश्चिमी क्षेत्र के टीवीके नेताओं को कई बार सावधानी से बोलने की हिदायत दी। रिपोर्ट में दावा है कि पार्टी नेतृत्व तक यह जानकारी पहुंची थी कि कुछ नेता सरकार के अंदरूनी मामलों से जुड़ी बातें सार्वजनिक कर रहे हैं।
हालांकि, कथित तौर पर इस सलाह से कुछ नेताओं में नाराजगी भी है। उनके बीच यह सवाल उठने की बात कही गई है कि उन्हें सार्वजनिक रूप से बोलने से रोकने का अधिकार आखिर किसे है।
थोप्पु वेंकटाचलम को डीएमके पद से हटाने पर चर्चा
डीएमके के ईरोड केंद्रीय जिला सचिव रहे थोप्पु वेंकटाचलम को पार्टी पद से हटाए जाने का मामला भी राजनीतिक चर्चा में है।
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनावी हार के बाद उनकी गतिविधियों को पद से हटाए जाने की वजह बताया गया है। साथ ही पूर्व मंत्री मुथुसामी के खिलाफ उनकी कथित गतिविधियों को भी एक अहम कारण माना जा रहा है।
इसके अलावा दावा किया गया है कि थोप्पु वेंकटाचलम टीवीके में जाने की संभावनाओं पर विचार कर रहे थे और डीएमके के कुछ नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को भी पार्टी छोड़ने के लिए प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे।
पद से हटाए जाने के बाद थोप्पु वेंकटाचलम ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्हें हटाने की वजह पार्टी नेतृत्व को बतानी चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समय आने पर इसका जवाब सामने आएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, अब वह स्थानीय निकाय चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपने समर्थकों को संगठित करने में जुटे हैं।
प्रशांत किशोर की जीत से उत्साहित सीमान?
बिहार के बंकिपुर उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की जीत ने भी राजनीतिक हलकों में ध्यान खींचा है। रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा चुनाव में 3.44 प्रतिशत वोट हासिल करने के बाद उनकी पार्टी ने बीजेपी के प्रभाव वाले क्षेत्र में जीत दर्ज की।
इस जीत से सीमान के उत्साहित होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद अपनी पार्टी को फिर से मजबूत करने के लिए सीमान प्रशांत किशोर की रणनीति से प्रेरणा लेते हुए अंबासमुद्रम उपचुनाव में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं।
बताया गया है कि सीमान ने बूथ स्तर तक पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली है। अब वह अपनी राजनीतिक गतिविधियों को तेज करने के साथ टीवीके के खिलाफ अभियान को भी धार देने की तैयारी में हैं।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सीमान ने कुछ राजनीतिक नेताओं से चुनाव में समर्थन को लेकर बातचीत की है और उन्हें चुनाव के समय मदद का भरोसा मिलने की बात कही जा रही है।
पत्रकारों पर कथित हमले को लेकर भी विवाद
तमिलनाडु की राजनीति में पत्रकारों पर कथित हमले का मुद्दा भी विवाद का कारण बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, टीवीके के रानीपेट जिला प्रभारी और शोलिंगर विधायक कपिल पर पत्रकारों के साथ मारपीट करने के आरोप लगे थे। इस मामले को लेकर राजनीतिक दलों और पत्रकार संगठनों की ओर से आलोचना किए जाने का भी उल्लेख है।
इसके बाद तंजावुर के सेंगिपट्टी में उदयनिधि स्टालिन से जुड़ी जांच के दौरान खबर जुटा रहे पत्रकारों पर डीएमके कार्यकर्ताओं द्वारा कथित हमले की खबर सामने आई।
इस घटना पर मंत्री राजमोहन ने डीएमके पर निशाना साधते हुए पत्रकारों के खिलाफ हिंसा की आलोचना की। वहीं, इसी बयान को लेकर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि टीवीके विधायक पर लगे आरोपों के समय मंत्री की प्रतिक्रिया अलग क्यों थी। इसी वजह से राजनीतिक विरोधियों की ओर से उन पर पक्षपात का आरोप लगाया जा रहा है।
कई मोर्चों पर घिरी तमिलनाडु की राजनीति
उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी से जुड़ा विवाद, टीवीके के भीतर नेताओं की बयानबाजी, थोप्पु वेंकटाचलम को डीएमके पद से हटाया जाना और सीमान की नई राजनीतिक रणनीति—इन सभी घटनाक्रमों ने तमिलनाडु की राजनीति को गरमा दिया है।
अब आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक दलों की अगली चाल क्या होती है और सीमान अपनी संगठनात्मक रणनीति को किस तरह जमीन पर उतारते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी।