Independence Day 2026: राष्ट्रपति भवन में दिखेगी छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, गेंड़ी और गौर मड़िया नृत्य होंगे खास आकर्षण

Independence Day 2026 पर राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की लोक एवं जनजातीय संस्कृति की प्रस्तुति

नई दिल्ली: Independence Day 2026 के मौके पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस स्वागत समारोह में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक और जनजातीय संस्कृति की खास झलक देखने को मिलेगी। 15 अगस्त को होने वाले ‘एट होम’ समारोह में छत्तीसगढ़ के साथ गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की पारंपरिक कला एवं सांस्कृतिक विरासत को भी मंच दिया जाएगा।

इस खास आयोजन में छत्तीसगढ़ की ओर से गेंड़ी और गौर मड़िया नृत्य प्रमुख आकर्षण होंगे। हरेली पर्व से जुड़ी गेंड़ी परंपरा में कलाकार बांस की ऊंची गेंड़ियों पर संतुलन और कौशल का प्रदर्शन करते हैं। वहीं, बस्तर के मड़िया समुदाय से जुड़ा गौर मड़िया नृत्य पारंपरिक वेशभूषा और विशेष शिरोभूषण के जरिए जनजातीय जीवन, वीरता और प्रकृति से जुड़ाव को दर्शाता है।

बस्तर की मंगल धुन से होगी सांस्कृतिक प्रस्तुति की शुरुआत

राष्ट्रपति भवन में होने वाली संगीत प्रस्तुति को देश की अलग-अलग लोक परंपराओं की सांस्कृतिक यात्रा के रूप में तैयार किया गया है। इसकी शुरुआत छत्तीसगढ़ और बस्तर की पारंपरिक अनुष्ठानिक परंपराओं पर आधारित मंगल धुन से होगी। इसके बाद महाराष्ट्र, गोवा और मध्य प्रदेश की संगीत परंपराओं को भी प्रस्तुत किया जाएगा।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में चारों राज्यों के कलाकार एक साथ संयुक्त प्रस्तुति देंगे। इस आयोजन में करीब 35 कलाकार विभिन्न लोक नृत्यों और पारंपरिक संगीत प्रस्तुतियों में हिस्सा लेंगे। इनमें लावणी, तुतारी, सोंगी मुखावटे, गेंड़ी, गौर मड़िया, भगोरिया, बैगा करमा, सामई और घोड़े मोडनी जैसी प्रस्तुतियां शामिल हैं।

बालोद और नारायणपुर के कलाकार भी होंगे शामिल

छत्तीसगढ़ के बालोद और नारायणपुर के कलाकार भी राष्ट्रपति भवन में होने वाली इस सांस्कृतिक प्रस्तुति का हिस्सा बनेंगे। बालोद के कलाकार मोहरी, दफड़ा, दमाऊ, गुड़ुम और बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों के जरिए लोक संगीत की झलक पेश करेंगे।

वहीं नारायणपुर के कलाकार गुटा परई, नार परई, ढोल और कुंदिर जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों के माध्यम से बस्तर की संगीत विरासत को राष्ट्रीय मंच पर सामने रखेंगे।

बस्तर के शिल्प और पनिका बुनाई भी होगी प्रदर्शित

राष्ट्रपति भवन के आयोजन में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान केवल नृत्य और संगीत तक सीमित नहीं रहेगी। राज्य की पारंपरिक हस्तशिल्प और वस्त्र परंपराओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

बस्तर की ढोकरा कला और पारंपरिक लौह शिल्प के साथ छत्तीसगढ़ की पनिका बुनाई भी इस सांस्कृतिक प्रस्तुति का हिस्सा होगी। इसके अलावा महाराष्ट्र की करवत काठी साड़ी, गोवा की कुंभी साड़ी और मध्य प्रदेश की महेश्वरी बुनाई को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

संस्कृति और प्रकृति के रिश्ते पर रहेगा जोर

इस साल की सांस्कृतिक प्रस्तुति में लोक परंपराओं के साथ प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के संबंध को भी रेखांकित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में बस्तर की पारंपरिक जीवनशैली, हस्तशिल्प और पवित्र उपवनों के संरक्षण जैसी परंपराएं समुदाय और प्रकृति के बीच गहरे रिश्ते को दर्शाती हैं।

राष्ट्रपति भवन में स्वतंत्रता दिवस के इस विशेष आयोजन के जरिए छत्तीसगढ़ की लोक कला, जनजातीय विरासत, बस्तर की संगीत परंपरा, पारंपरिक वाद्ययंत्र, हस्तशिल्प और पनिका बुनाई को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलेगी। यह प्रस्तुति राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक पहचान को देशभर के सामने रखने का एक खास अवसर होगी।

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