संसद मानसून सत्र: आखिरी हफ्ते की शुरुआत हंगामेदार, विपक्ष की नारेबाजी से लोकसभा-राज्यसभा में कामकाज बाधित

संसद मानसून सत्र 2026 के आखिरी हफ्ते में विपक्ष की नारेबाजी और हंगामा

संसद मानसून सत्र 2026: आखिरी हफ्ते के पहले दिन भारी हंगामा, विपक्ष ने सरकार को घेरा

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का आखिरी सप्ताह सोमवार को भारी राजनीतिक हंगामे के साथ शुरू हुआ। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। इसके चलते सदन की कार्यवाही कई बार प्रभावित हुई और स्थगन की स्थिति बनी।

विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई। आखिरी सप्ताह में सरकार कई अहम विधेयकों को सदन में आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष अपनी मांगों को लेकर लगातार दबाव बना रहा है।

गृह मंत्री से जवाब की मांग पर अड़ा विपक्ष

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष की ओर से दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और पेपर लीक से जुड़े आरोपों पर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में जवाब देने की मांग की गई।

इसके अलावा राम मंदिर चंदा विवाद सहित कई अन्य मुद्दों को भी विपक्ष ने सदन में उठाने की कोशिश की। इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनी रही।

हंगामे के बीच कई विधेयक पेश

लोकसभा में विपक्षी सांसदों के विरोध और नारेबाजी के बीच सरकार ने विधायी कामकाज जारी रखने की कोशिश की। इस दौरान न्यायाधिकरण सुधार (संशोधन) विधेयक 2026 समेत कई विधेयक सदन में पेश किए गए।

इनमें खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक शामिल हैं।

FCRA संशोधन विधेयक पर भी सियासी टकराव

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA में प्रस्तावित बदलाव भी राजनीतिक बहस का अहम मुद्दा बना हुआ है। विदेशी फंडिंग, संगठनों और एनजीओ से जुड़े वित्तीय नियमों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद बने हुए हैं।

परिसीमन और अन्य विधायी प्रस्तावों को लेकर भी सदन में राजनीतिक खींचतान जारी है।

सरकार के सामने अहम विधेयक पास कराने की चुनौती

मानसून सत्र के बचे हुए दिनों में सरकार कई महत्वपूर्ण आर्थिक और प्रशासनिक विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। बैंकिंग से जुड़े विधायी प्रस्ताव और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या से संबंधित प्रावधान भी चर्चा में रहे हैं।

वहीं विपक्ष का कहना है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए और सदन में उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए।

ओम बिरला ने जताई नाराजगी

लगातार हंगामे और कार्यवाही बाधित होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी आपत्ति जताई। उन्होंने प्रश्नकाल को बाधित करने और लगातार सदन की कार्यवाही ठप होने को संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं बताया।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जाहिर की।

आखिरी दिनों में बढ़ सकता है टकराव

मानसून सत्र के अंतिम कुछ दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना है। एक ओर सरकार लंबित विधेयकों को पारित कराने की कोशिश में है, वहीं विपक्ष अपने मुद्दों पर चर्चा और सरकार से जवाब की मांग को लेकर दबाव बनाए हुए है।

ऐसे में संसद के मानसून सत्र के आखिरी सप्ताह में विधायी कामकाज के साथ-साथ राजनीतिक हंगामा भी जारी रहने के आसार हैं।

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