झीरम घाटी हमला केस में आज अहम सुनवाई, 28 कांग्रेस नेताओं की हत्या के मामले में अंतिम दलीलें पूरी होने की उम्मीद

झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में अंतिम सुनवाई और संभावित फैसले को लेकर बढ़ी हलचल

Jhiram Ghati Case: झीरम घाटी हमले में आज अंतिम सुनवाई, 28 नेताओं की हत्या का क्या आएगा फैसला?

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। 25 मई 2013 को हुए इस भीषण माओवादी हमले में प्रदेश कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत 28 लोगों की मौत हुई थी। मामले में 10 अगस्त को अंतिम दलीलें होने की संभावना है, जिसके बाद अदालत फैसला सुरक्षित रख सकती है या निर्णय सुनाने की तारीख तय कर सकती है।

10 अगस्त को हो सकती है अंतिम सुनवाई

झीरम घाटी केस में अभियोजन और बचाव पक्ष अंतिम बहस के लिए तैयार हैं। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने दावों के समर्थन में 101 गवाहों के बयान और महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए हैं।

अब अंतिम बहस में अभियोजन पक्ष गवाहों के बयानों और दस्तावेजों के आधार पर आरोपों को साबित करने की कोशिश करेगा। वहीं, बचाव पक्ष आरोपियों के पक्ष में अपनी अंतिम दलीलें रखेगा।

अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद अदालत फैसला सुरक्षित रख सकती है या फैसला सुनाने के लिए अगली तारीख निर्धारित कर सकती है।

2013 में हुआ था झीरम घाटी का खूनी हमला

25 मई 2013 को विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान दक्षिण बस्तर की झीरम घाटी में माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के कई नेताओं समेत 28 लोगों की जान चली गई थी।

यह घटना छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े राजनीतिक हत्याकांडों में गिनी जाती है। हमले के बाद से ही इसके पीछे की पूरी साजिश और जिम्मेदार लोगों को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं।

11 आरोपियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई

मामले में फिलहाल 11 आरोपियों के खिलाफ न्यायिक कार्यवाही चल रही है। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो चुकी है, जबकि बाकी आरोपियों के खिलाफ अदालत में कार्यवाही जारी है।

अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए बड़ी संख्या में गवाहों के बयान दर्ज कराए हैं और दस्तावेजी साक्ष्य भी पेश किए हैं। अब सभी की नजर अंतिम दलीलों और उसके बाद आने वाले अदालत के फैसले पर है।

झीरम घाटी मामले की चार बार हुई जांच

झीरम घाटी हमले की जांच के लिए अब तक चार अलग-अलग स्तरों पर जांच कराई जा चुकी है। तत्कालीन रमन सिंह सरकार ने घटना की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया था।

इसके अलावा 2013 में FIR दर्ज होने के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने भी मामले की जांच की थी। बाद में जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA को सौंप दी गई।

2018 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया था। राज्य सरकार ने NIA से जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग भी की थी, ताकि आगे की जांच की जा सके। हालांकि, NIA ने अदालत में मामले में आरोपपत्र दाखिल किए जाने का हवाला देते हुए रिपोर्ट देने से इनकार कर दिया था।

फैसले पर टिकी सबकी नजर

करीब 13 साल पुराने झीरम घाटी हमले के मामले में अब अंतिम कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर है। 10 अगस्त की सुनवाई में अंतिम दलीलें पूरी होती हैं तो इसके बाद अदालत के अगले कदम को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।

झीरम घाटी हमले में मारे गए कांग्रेस नेताओं और अन्य लोगों के परिजनों के लिए भी यह मामला लंबे समय से न्याय की उम्मीद से जुड़ा हुआ है।

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