DGCA News: पायलट्स ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी, DGCA की जगह Autonomous Civil Aviation Authority की मांग
DGCA News: भारत के तेजी से विस्तार करते एविएशन सेक्टर के बीच पायलटों के संगठन Federation of Indian Pilots (FIP) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश के मौजूदा विमानन नियामक ढांचे में बड़े बदलाव की मांग की है। संगठन ने Directorate General of Civil Aviation (DGCA) की जगह एक स्वतंत्र और स्वायत्त Civil Aviation Authority (CAA) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है।
पायलट्स क्यों चाहते हैं DGCA की जगह नई अथॉरिटी?
FIP का कहना है कि भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से बड़ा हो रहा है। यात्रियों की संख्या, विमानों के बेड़े, एयरपोर्ट, एयर कार्गो और नई विमानन तकनीकों में लगातार विस्तार हो रहा है। ऐसे में संगठन का मानना है कि देश के रेगुलेटरी सिस्टम को भी इसी गति से आधुनिक और मजबूत बनाने की जरूरत है।
पायलट्स के मुताबिक, मौजूदा DGCA की प्रशासनिक स्वायत्तता, वित्तीय लचीलापन, तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति और नियामकीय फैसले लेने की क्षमता को और मजबूत करने की जरूरत है। इसी वजह से एक अलग वैधानिक और स्वायत्त नियामक संस्था बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
PM मोदी को पत्र में क्या मांग रखी?
Federation of Indian Pilots ने प्रधानमंत्री मोदी से Civil Aviation Authority of India के गठन की पुरानी प्रस्तावित योजना को फिर से आगे बढ़ाने की अपील की है। प्रस्तावित संस्था को DGCA की जगह काम करने वाला अधिक स्वतंत्र और तकनीकी रूप से सक्षम रेगुलेटर बनाने की बात कही गई है।
FIP का कहना है कि नई अथॉरिटी को वित्तीय, प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर अधिक स्वतंत्रता मिलने से विमानन क्षेत्र की निगरानी और नियमन को बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा।
एविएशन सेक्टर के बढ़ते आकार का दिया हवाला
पायलट संगठन ने अपने प्रस्ताव के पीछे भारत के तेजी से बढ़ते विमानन बाजार को प्रमुख कारण बताया है। संगठन के अनुसार, देश में एविएशन से जुड़ा बुनियादी ढांचा और परिचालन लगातार विस्तार कर रहा है। ऐसे में सुरक्षा मानकों और नियामकीय निगरानी को भी उसी स्तर पर मजबूत करना जरूरी है।
FIP ने अपने प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय मानकों और विमानन सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का भी हवाला दिया है। संगठन का मानना है कि एक स्वतंत्र रेगुलेटर भारत की एविएशन इंडस्ट्री को वैश्विक मानकों के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने में मदद कर सकता है।
क्या DGCA को पूरी तरह खत्म किया जाएगा?
फिलहाल यह पायलट संगठन की ओर से की गई मांग और प्रस्ताव है। इसका मतलब यह नहीं है कि DGCA को तत्काल खत्म कर दिया गया है। नई Civil Aviation Authority बनाने के लिए सरकार की ओर से निर्णय और आगे की विधायी प्रक्रिया जरूरी होगी।
मौजूदा समय में DGCA भारत में नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़े नियमन का प्रमुख निकाय है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मांग?
भारत में विमानन क्षेत्र का विस्तार होने के साथ सुरक्षा, नियमन, तकनीकी निगरानी और विशेषज्ञ अधिकारियों की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में FIP का प्रस्ताव आने वाले समय में देश के एविएशन रेगुलेशन के ढांचे में संभावित बदलाव को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि केंद्र सरकार पायलटों की इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या Civil Aviation Authority बनाने के पुराने प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाता है।